इबादत की तारीफ़ |


इबादत की तारीफ़
इबादत की तारीफ़
  इबादत यानी झुक जाना उस शख़्स का जो अपने वुजूद व अमल में मुस्तक़िल न हो उस की ज़ात के सामने जो अपने वुजूद व अमल में इस्तिक़लाल रखता हो।
यह तारीफ़ बयान करती है कि तमाम कायनात में ख़ुदा के अलावा कोई शय इस्तिक़लाल नही रखती फ़क़त जा़ते ख़ुदा मुस्तक़िल व कामिल है और अक़्ल का तक़ाज़ा है कि हर नाक़िस को कामिल की ताज़ीम करना चाहिये चूं कि ख़ुदा वंदे आलम कामिल और अकमल ज़ात है बल्कि ख़ालिक़े कमाल है लिहाज़ा उस ज़ात के सामने झुकाव व ताज़ीम व तकरीम मेयारे अक़्ल के मुताबिक़ है।