ज़ियारते नाहिया और उसूले काफ़ी |


ज़ियारते नाहिया और उसूले काफ़ी
ज़ियारते नाहिया और उसूले काफ़ी
  कहते है कि इसी ग़ैबत के ज़माने में नाहिया मुक़द्देसा से एक ऐसी ज़ियारत बरामद हुई है, जिसमें तमाम शोहदाए कर्बला और उनके क़ातिलों के नाम हैं। इसे ? ज़ियारते नाहिया ? कहा जाता है।

इसी तरह यह भी कहा जाता है कि उसूले काफ़ी जो कि हज़रत सिक़्क़तुल इस्लाम अल्लामा कुलैनी मुतावफ़्फ़ी 328 हिजरी की 20 साला तसनीफ़ है। वह जब इमाम अस्र कि ख़िदमत में पेश हुई तो आपने फ़रमाया هذا كافي لشيعتنا यह हमारे शियों के लिए काफ़ी है।

ज़ियारते नाहिया की तौसीक़ बहुत से उलमा ने की है जिनमें अल्लामा तबरसी और मजलिसी भी हैं। दुआ ? ए- सबासब आप ही से मरवी है।