अली बिन मुहम्मद अल समरी |


नाऐबे ख़ासे इमामे ज़मान (अ)



नाऐबे ख़ासे इमामे ज़मान (अ)
  अली बिन मुहम्मद अल समरी हुसैन बिन रौह (र0) की वफ़ात के बाद इमाम अलैहिस्सलाम के हुक्म से जनाब अली बिन मुहम्मद अल समरी इस ओहदा -ए- जलील पर फ़ाइज़ हुए। आपकी कुन्नियत अबुल हसन थी। आप अपने फ़राइज़ अंजाम दे रहे थे, जब वक़्त क़रीब आया तो आपसे कहा गया कि आप अपने बाद का क्या इन्तेज़ाम करेंगें। आपने फ़रमाया कि अब आईन्दा यह सिलसिला न रहेगा।



(मजालेसुल मोमेनीन, सफ़ा 89 व जज़ीर ?ए- ख़िज़रा, सफ़ा 6, व अनवार उल हुसैनिया, सफ़ा 55)



मुल्ला जामी अपनी किताब शवाहेदुन नुबूव्वत के सफ़ा 214 में लिखते है कि मुहम्मद समरी के इन्तेक़ाल से 6 दिन पहले इमाम अलैहिस्सलाम का एक फ़रमान नाहिया मुक़द्दसा से बरामद हुआ। जिसमें उनकी वफ़ात का ज़िक्र और सिलसिल ?ए- सिफ़ारत के ख़त्म होने का तज़किरा था। इमाम महदी अलैहिस्सलाम के ख़त के अल्फ़ाज़ यह हैं।



بسم الله الرحمن الرحيم يا علي يابن محمداعظم الله اجرا خوائنك فيك فعنك ميت ما بينك و بين سنت ايام فاعظم امرك ولا ترض الي احد يا قوم مقامك بعد وفاتك فقد وقعت الغيبة التامة فلا ظهور الي بعد باذن الله تعالي و ذلك بعدة العامد



तर्जमाः- ऐ अली बिन मुहम्मद ! ख़ुदा वन्दे आलम तुम्हारे भाईयों और दोस्तों को अजरे जमील अता करे। तुम्हें मालूम है कि तुम 6, दिन में वफ़ात पाने वाले हो, तुम अपने इन्तेज़ामात कर लो और आइन्दा के लिये आपना कोई क़ायम मक़ाम तजवीज़ व तलाश न करो। इस लिए कि ग़ैबत कुबरा वाक़े हो गई होगी और इज़्ने ख़ुदा के बग़ैर ज़हूर ना मुमकिन होगा। या ज़हूर बहुत तवील अर्से के बाद होगा।



ग़रज़ कि 6, दिन गुज़रने के बाद हज़रत अबुल हसन अली बिन मुहम्मद अल समरी बतारीख़ 15 शाबान 329 हिजरी इन्तेक़ाल फ़रमा गये और फ़िर कोई ख़ुसूसी सफ़ीर मुक़र्र नही हुआ और ग़ैबते कुबरा शुरू हो गई।