कौसर का सदफ़ |


कौसर का सदफ़
कौसर का सदफ़
  दुनिया की सैक़ड़ों बा फ़ज़ीलत ख़्वातीन में सिर्फ़ एक ऐसी ख़ातून मिलती हैं जिस ने इस दुनिया के नफ़ीस मोती, ख़ुदावंदे आलम के बे मिसाल मोती के एक दाने, दुनिया की शहज़ादियों की शहज़ादी, पैग़म्बरे ख़ातम (स) की आली मर्तबा बेटी, ख़्वातीने बनी आदम की सरदार, हज़रते ज़हरा ए अतहर (स) को अपनी गोद में परवरिश दी, उस ख़ातून का नाम हज़रत खदीजा (स) है। हज़रत ख़दीजा (स) के ज़रिये पैग़म्बरे इस्लाम (स) साहिबे औलाद बने। जिन में दो बेटे और एक बेटी थी। बेटे तो बचपने में इस दुनिया से रुख़सत हो गये लेकिन बेटी इस कायनात का चश्म ए जारी, गयारह इमामों की माँ, हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) हैं। तमाम मुवर्रेख़ीन लिखते हैं कि पैग़म्बरे अकरम (स) सिर्फ़ अपनी दो बीबियों से साहिबे औलाद हुए। जिन में एक हज़रत खदीजा (स) और दूसरी मारिया थीं। मारिया क़िबतिया से पैग़म्बर इस्लाम (स) के यहाँ इब्राहीम जैसा बेटा पैदा हुआ। जो सिर्फ़ तीन साल की उम्र में दुनिया से चला गया। हज़रत खदीजा (स) से दो बेटे और एक बेटी पैदा हुई।



1. क़ासिम, जो पैग़म्बरे इस्लाम (स) के सबसे बड़े बेटे हैं। जिनकी विलादत बेसत से पहले हुई थी।

2. अब्दुल्लाह, जो बेसत के बाद पैदा हुए। इसी वजह से उन्हे तैय्यब व ताहिर के लक़्ब से याद किया जाता है।[1] क़ासिल चार साला ज़िन्दगी में दुनिया से रुख़्सत हो गये और अब्दुल्लाह भी एक महीने के बाद शीर ख़्वारगी के दौरान इस दुनिया से रुख़सत हो गये।[2] चूँकि पैग़म्बरे इस्लाम (स) के दोनो बेटे मुख़्तसर से अरसे में दुनिया से रुख़सत हो गये। लिहाज़ा आस बिन वायल ने आप को अबतर कह कर पुकारा। क़ासिदे वही पैग़म्बर पर नाज़िल हुआ और सूर ए मुबारक ए कौसर की पैग़म्बर (स) के क़ल्बे मुबारक पर वही के उनवान से तिलावत की कि ख़ुदा वंदे आलम हज़रत फ़ातेमा (स) जैसी शख़्सियत को चश्म ए जारी बना कर अता कर रहा है। इस तरह से पैग़म्बरे अकरम (स) की पाक व ताहीर नस्ल सफ़ह ए गेती पर जारी हुई।



अभी हज़रत ज़हरा (स) शिकमे मादर में थीं कि पैग़म्बरे रहमत ने फ़रमाया: ऐ ख़दीजा (स), तुझे तेरी बेटी मुबारक हो। ख़ुदा वंदे आलम उसे मेरे गयारह जानशीनों की माँ क़रार देगा जो मेरे और अली (अ) के बाद मंसबे इमामत पर फ़ायज़ होगें।[3]

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[1]. क़ाज़ी नोमान, शरहुल अख़बार जिल्द 3 पेज 17

[2]. इब्ने कलबी, जमहरतुन नसब पेज 30, इब्ने अब्दुर बर, अल इसतिआब जिल्द 4 पेज 1819, इब्ने हजर अल इसाबा जिल्द 2 पेज 237

[3]. याक़ूबी, अत तारीख़ी जिल्द 2 पेज 26