हज़रत खदीजा(अ) की दौलत |


हज़रत खदीजा(अ) की दौलत
हज़रत खदीजा(अ) की दौलत
  हज़रत खदीजा(अ) की दौलत



कई सालों से क़ुरैश का सब से बड़ा तिजारती कारवाँ हज़रत ख़दीजा (स) के इख़्तियार में था जिस की वजह से आप मालामाल हो गई। आपने वह सब सरवत व दौलत पैग़म्बरे इस्लाम (स) के हवाले कर दिया ताकि आप अपनी मर्ज़ी से उसे ख़र्च करें। उसके बाद भी जो कुछ दुनियावी माल में से आप के पास आता था उसे पैग़म्बर (स) के हवाले कर देती थीं लिहाज़ा जब आपका भतीजा हकीम बिन हिज़ाम आपसे मिलने आया तो ज़ैद बिन हारेसा को ग़ुलाम की शक्ल में उसे बख़्श दिया उसने फ़ौरन पैग़म्बर (स) को बख़्श दिया। पैग़म्बर (स) ने उसे आज़ाद करना चाहा लेकिन उसने ख़ानदाने वही का ख़िदमत गुज़ार बन कर रहने तरजीह दी।[1] ज़ोहरी कहता है कि हज़रत खदीजा (स) अपने अमवाल को चालीस हज़ार, चालीस हज़ार में तक़सीम करके पैग़म्बर (स) की ख़िदमत में पेश किया करती थीं।[2] अल्लामा मामक़ानी लिखते हैं कि तारीख़ के मुतावातिरात में से हैं कि इस्लाम का मुक़द्दस आईन हज़रत अली (अ) की तलवार और हज़रत खदीजा (स) की दौलत का मरहूने मिन्नत हैं।[3]


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[1]. तबरसी, आलामुल वरा जिल्द 1 पेज 275

[2]. इब्ने हजर, अल इसाबा जिल्द पेज 598

[3]. दख़ील, उम्मुल मोमिनीन ख़दीजा पेज 23