नमाज़ का मज़ाक़ बनाना पूरे दीन का |


नमाज़ का मज़ाक़ बनाना पूरे दीन का मज़ाक़ बनाना है
नमाज़ का मज़ाक़ बनाना पूरे दीन का मज़ाक़ बनाना है
 



नमाज़ का मज़ाक़ बनाना पूरे दीन का मज़ाक़ बनाना है


रिफ़ाह और सवीद नाम के दो मुशरेकीन ने पहले इस्लाम क़बूल किया और बाद मे मुनाफ़ेक़ीन के साथ हो गये। कुछ मुसलमान उनके पास आने जाने लगे तो सूरए मायदा की 57 और 58वी आयतें नाज़िल हुई कि ऐ मोमेनीन जो तुम्हारे दीन का मज़ाक़ उड़ाये उनसे दोस्ती न करो। क्योंकि जब तुम अज़ान देते हो तो वह मज़ाक़ बनाते हैं। आपस मे मिली हुई इन दो आयतों मे पहले फ़रमाया गया कि वह तुम्हारे दीन का मज़ाक़ बनाते हैं। बाद मे कहा गया कि अज़ान का मज़ाक़ उड़ाते हैं। इससे मालूम होता है कि नमाज़ दीन का निचौड़

नमाज़ का मज़ाक़ बनाने वालों से दोस्ती करने का किसी भी मुसलमान को हक़ नही है लिहाज़ा न उनसे दोस्ती की जाये और न ही उन से किसी क़िस्म का रबिता रखा जाये।