नमाज़ की आवाज़ पैदा होने की |


नमाज़ की आवाज़ पैदा होने की जगह से कब्र तक
नमाज़ की आवाज़ पैदा होने की जगह से कब्र तक
 



नमाज़ की आवाज़ पैदा होने की जगह से कब्र तक

शरीअत ने ताकीद की है कि बच्चे के पैदा होने के बाद उसके कानों मे अज़ान और इक़ामत कही जाये। और मरने के बाद दफ़्न के वक़्त उसकी नमाज़े जनाज़ा को वाजिब किया है। पैदाइश के वक़्त से दफ़्न होने तक किसी भी दूसरी इबादत को नमाज़ की तरह इंसान पर लाज़िम नही किया गया है।