इमामे सादिक़(अ)की नसीहतें | अली अब्बास हमीदी


इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की नसीहतें
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की नसीहतें
 

इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की नसीहतें

अली अब्बास हमीदी


आबान बिन तग़लिब का बयान है कि मैं ने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम से दरयाफ़्त किया कि कौन चीज़ इंसान में ईमान को साबित रखती है?

आप ने फ़रमाया: इंसान में ईमान को साबित रखने वाली चीज़ परहेज़गारी है और इंसान से ईमान को निकाल देने वाली चीज़ परहेज़गारी है।

इमाम अलैहिस सलाम ने हम्माद से फ़रमाया: अगर तू चाहता है कि तेरी आंख़ें रौशन हों (तूझे ख़ुशी हासिल हो) और दुनिया व आख़िरत की भलाई नसीब हो तो जो कुछ लोगों के हाथ में है उस का लालच न कर और खुद को मर्दों में शुमार कर, दिल में यह न कह कि तू लोगों में से किसी से बुलंद मर्तबा है और अपनी ज़बान की हिफ़ाज़त जिस तरह अपने माल की हिफ़ाज़त करता है।

अम्र बिन सईदे सक़फ़ी से मंकूल है कि मैं ने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम से अर्ज़ किया कि मैं हमेशा आप की ज़ियारत से मुशर्रफ़ नही हो सकता लिहाज़ा आप मुझे ऐसी चीज़ तालीम फ़रमायें कि जिस पर अमल पैरा हो कर मैं कामयाबी से हम किनार हो जाऊँ।

इमाम अलैहिस सलाम ने फ़रमाया: मैं तूझे अल्लाह से डरने, परहेज़गारी इख़्तियार करने और नेकियों के अंजाम देने की वसीयत करता हूँ। तुम्हे मालूम होना चाहिये कि नेकियों के अंजाम देने का उस वक़्त तक कोई फ़ायदा नही जब तक परहेज़गारी उस के साथ न हो।

इमाम जाफ़िर सादिक़ अलैहिस सलाम ने वसीयत की ख़्वाहिश रखने वाले एक शख़्स से फ़रमाया:

सफ़रे आख़िरत के लिये ज़ादे राह इकठ्ठा करो और जाने से पहले उसे भेज ता कि तुम्हे मरते वक़्त दूसरों से इलतेमास और वसीयत न करनी पड़ी कि वह बाद में तुम्हारे लिये ज़ादे राह भेज दें।