महदी (अ.) का ज़हूर यक़ीनी है |


महदी (अ.) का ज़हूर यक़ीनी है
महदी (अ.) का ज़हूर यक़ीनी है
  महदी (अ.) का ज़हूर यक़ीनी है



मुहम्मद बिन अली तिरमीज़ी अपनी सहीह में पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत करते हैं, हज़रत ने फ़रमाया: यानी दुनिया फ़ना नही होगी, यहाँ तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स तमाम अरब पर हुकुमत करेगा जिस का नाम मेरे नाम पर होगा।


इमाम हम्बल बयान करते हैं रसूलल्लाह ने फ़रमाया ज़माना बाक़ी रहेगा यहाँ तक कि मेरे अहलेबैत में से एक शख़्स तमाम अरब का मालिक क़रार पायेगा


मुहम्मद बिन अली तिरमीज़ी अपनी सहीह में पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत करते हैं, हज़रत ने फ़रमाया: यानी दुनिया फ़ना नही होगी, यहाँ तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स तमाम अरब पर हुकुमत करेगा जिस का नाम मेरे नाम पर होगा। इमाम हम्बल बयान करते हैं रसूलल्लाह ने फ़रमाया ज़माना बाक़ी रहेगा यहाँ तक कि मेरे अहलेबैत में से एक शख़्स तमाम अरब का मालिक क़रार पायेगा। उसका नाम मेरे नाम पर होगा।[3] सहीहे तिरमीज़ी मेंरसूलुल्लाह (स.) से इस तरह रिवायत की गई है कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जिसका नाम मेरे नाम पर होगा। अहमद अपनी मुस्नद में रसूलुल्लाह (स.) से रिवायत करते हैं कि हुज़ूर (स.) ने फ़रमाया कि क़ियामत उस वक़्त तक नही आयेगी, जब तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर न हो जाये और उसका नाम मेरे नाम पर होगा। अबी सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि वह बयान करते हैं कि हमें नबी ए करीम (स.) के बाद कोई हादेसः वाक़े होने का ख़ौफ़ दामनगीर था, चुनान्चे हमने हज़रत से सवाल किया। आपने फ़रमाया मेरी उम्मत से महदी ज़हूर करेगा जो पाँच या सात या नौ साल तक ज़िन्दगी गुज़ारेगा।[4] अबु दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम(स.) से रिवायत करते हैं हुज़ूर ने फ़रमाया: अगर ज़माना एक रोज़ भी बाक़ी रहेगा यक़ीनन ख़ुदावन्दे आलम मेरे अहलेबैत से एक शख़्स को ज़ाहिर करेगा जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से उसी तरह भर देगा जिस तरह से वह उससे पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। (सहीहे अबी दाऊद) अबू दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम (स.) से रिवायत करते हैं कि हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया ख़त्म न होगी यहाँ तक कि मेरे अहले बैत से एक शख़्स तमाम अरब का हाकिम क़रार पायेगा, उसका नाम मेरे नाम पर होगा। (अबू दाऊद का का बयान दूसरी हदीस में इस तरह है) जो कि ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। 4. महदीफ़रज़न्देफ़ातिमाज़हराहैं। अबू दाऊद उम्मे सलमा से रिवायत करते हैं कि उम्मे सलमा फ़रमाती हैं कि मैने रसूलल्लाह (स.) को फ़रमाते सुना: المهدی من عترتی من ولد فاطمة महदी मेरी औलाद से फ़ातिमा का फ़रज़न्द है। (सहीहे अबी दाऊद) अबू दाऊद, अबी सईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: (मेरा महदी बलन्द पेशानी और बलन्द नाक वाला होगा। जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। सहीहे बुख़ारी में अबू क़ुतादा अंसारी के ग़ुलाम नाफ़े से रिवायत की गई है। वह बयान करता है कि अबू हुरैरा ने बयान किया कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: उस वक़्त तुम क्या करोगे, जबकि तुम्हारे दरमियान इब्ने मरियम (हज़रतेईसा) नाज़िल होगें और तुम्हारा इमाम तुम लोगों में से होगा? 5. महदी (अ.) अहलेबैतसेहैं। सहीहे इब्ने माजा में रसूलल्लाह (स.) से रिवायत की गई है कि हुज़ूर ने फ़रमाया: महदी अहलेबैत से होगा (जिसके ज़रिये) ख़ुदावन्दे आलम एक ही रात में इस्लाह फ़रमायेगा। सहीहे इब्ने माजा: में अनस इब्ने मालिक से रिवायत की गई है कि मालिक बयान करता है कि मैने रसूलल्लाह (स.) को फ़रमाते सुना हज़रत ने फ़रमाया: अब्दुल मुत्तलिब की औलाद में से मैं और हमज़ा व अली व जाफ़र, हसन व हुसैन और महदी जन्नत वालों के सरदार हैं। मुस्नदे अहमद बिन हम्बल: में अबू सईद से रिवायत की गई है। वह बयान करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया:(जब) ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी तो मेरी औलाद से एक शख़्स ज़हूर करेगा जो 7 या 9 साल हुकुमत करेगा और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। 6. महदी (अ.) आख़रीज़मानेमेंआयेगें। हाकिम नेशापुरी की मुसतदरक अस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है। उनका बयान है कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने फ़रमाया आख़िरी ज़माने में मेरी उम्मत पर उनके बादशाहों की जानिब से ऐसी शदीद मुसीबतें नाज़िल होगीं कि इससे पहले उनसे ज़्यादा शदीद मुसीबत कभी न सुनी होगी। यहाँ तक कि ज़मीन उन पर तंग हो जायेगी और ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी। मोमिन के लिए ज़ुल्म से महफ़ूज़ रहने के लिए कोई पनागाह न होगी। पस ख़ुदावन्दे आलम मेरे अहले बैत से एक शख़्स को भेजेगा जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। अहले आसमान और अहले ज़मीन उससे ख़ुश होगें। ज़मीन अपने अनाज के दाने ज़खीरे न करेगी, मगर उनके लिए निकाल देगी और आसमान भी बारिश के क़तरात न रोकेगा मगर ख़ुदावन्दे आलम उन पर मूसलाधार पानी बरसायेगा। महदी उन लोगों के दरमियान 7 या 8 या 9 साल ज़िन्दगी गुज़ारेगा उस ज़माने में ख़ुदा वंदे आलम की ख़ैर व बरकत देखकर मुर्दा लोग ज़िन्दगी की ख़्वाहिश करेंगें। मुसतदरके अहमद मेंअबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: मैं तुम लोगों को महदी की बशारत देता हूँ, जो मेरी उम्मत से है। लोगों के इख़्तेलाफ़ और ज़लज़लों के ज़माने में ज़ाहिर होगा। वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। ज़मीन व आसमान में बसने वाले उससे राज़ी होगें। लोगों के दरमियान माल को हिस्सों में तक़सीम करेगा। एक शख़्स ने सवाल किया सहाहन क्या है ? आपने फ़रमाया: (यानी) लोगों के दरमियान माल को (सही तरीक़े से) या मसावात व बराबरी के साथ तक़सीम करेगा। हज़रत (स.) ने फ़रमाया और ख़ुदावन्दे आलम मुहम्मद (स.) की उम्मत के दिलों को तवंगरी से भर देगा। कनुज़ुल हक़ाइक़ मेंअल्लामा मनावी रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: महदी जन्नत वालों के ताऊस हैं।[5] जामे उस सग़ीर मेंहाफ़िज़ सियुती (शाफ़ेई) रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: महदी मेरी औलाद से होगा, जिसकी पेशानी चमकते सितारे की तरह होगी। मुसनदे अहमद बिन हम्बल मेंइमाम अबू सईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: उस वक़्त तक क़ियामत नही आएगी जब तक मेरे अहले बैत से एक शख़्स, मेरी उम्मत में ज़ाहिर न होगा (और) वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी और वह 7 साल हुकुमत करेगा। अलमुस्तदरक अस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गई है कि रसूलल्लाह (स.) ने फ़रमाया: क़ियामत नही आयेगी यहाँ तक कि ज़मीन ज़ुल्म व जौर से और सरकशी से भर जायेगी। फिर मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़हूर करेगा और उसको अदल व इंसाफ़ से भर देगा, जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। यनाबी उल मवद्दत मेंक़तादा से रिवायत की गई है, क़तादा बयान करते हैं कि मैने सईद इब्ने मुसैयब से पूछा कि क्या महदी का ज़हूर हक़ है? उसने जवाब दिया हाँ, महदी औलादे फ़ातिमा (अ.) से बरहक़ हैं। मैने कहा महदी फ़ातिमा की कौन औलाद हैं, जवाब मिला कि तुम्हारे लिए सिर्फ़ इतना ही काफ़ी है।