इमाम मूसा सद्र |


इमाम मूसा सद्र
इमाम मूसा सद्र
 




9, शहरीवर सन 1357 (शम्सी हिजरी) को इस्लामी दुनिया के बड़े विध्दवान और लेबनान के शियों के धार्मिक नेता जनाब इमाम मूसा सद्र एक छोटे से सफर (यात्रा) पर लीबिया गए हुए थे



जहाँ से आपका अपहरण कर लिया गया।



इमाम मूसा सद्र कि जिसने यहूदियों के खिलाफ जंग की बुनियाद (आधार शिला) रखी थी 24, इस्फंद सन 1317 (शम्सी हिजरी) को क़ुम में इल्मो इज्तिहाद के घराने में पैदा हुए।



जनाब इमाम मूसा सद्र का सम्बन्ध एक बड़े और इल्मी घराने से था। आयतूल्लाह शहीद बाक़िरूस-सद्र, कि जो ज़ालिम सद्दाम के हाथों शहीद हुए, का सम्बन्ध भी इसी घराने से था।



इमाम मूसा सद्र ने दीनी पढ़ाई को क़ुम में समाप्त करने के बाद तेहरान यूनिवर्सिटी से हुक़ूक़ में एम.ए किया। उसके बाद सन 1338 (शम्सी हिजरी)



को लेबनान के शियों के धार्मिक नेता अल्लामा सैय्यद शर्फुद्दीन की दावत पर लेबनान की तरफ कूच किया।



अल्लामा सैय्यद शर्फुद्दीन के देहान्त के बाद और उनकी वसियत के अनुसार इमाम मूसा सद्र को लेबनान का धार्मिक नेता बनाया गया।



जनाब मूसा सद्र नें दीनी और सक़ाफती कार्यों के इलावा समाज से ग़रीबी मिटाने की बहुत ज़्यादा कोशिश की।



जनाब मूसा सद्र नें मुसलमानों की एक कमेटी, उनके हुक़ूक़ के लिए, बनाने की बहुत ज़्यादा मांग की थी और इसी तरह यहूदियों से डटकर लड़ने के लिए भी बहुत प्रभावशील क़दम उठाया।



इमाम मूसा सद्र बीस साल तक लेबनान में रहे और वहाँ शियों की तरक़्की के लिए बहुत से काम अंजाम दिए।



इसी तरह दीन ,एतिक़ाद और अखलाख़ की मज़बूती के लिए भी ठोस क़दम उठाए।



आपके बेहतरीन प्लान और प्रोग्राम और लेबनान के अक्सर नौजवान शियों की सहायता और मदद से बहुतसे काम और शुग़्ल वजूद में आए और उनमें से बहुत से पुरूष और महिलाएं स्कूल,



कालेज,यूनीवर्सिटी,कम्पनी और दूसरी जगहों पर काम करने और पढ़ने लगे। इस दरमियान आपका रोल लेबनान के शियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।



आपने लेबनान के लोगों को बताया कि यहूदियों के साथ किसी भी तरह का मेल-मिलाप हराम है। उन्होंने इस्राईली कट्टरपंथी यहूदियों से मुक़ाबले के लिए एक जंगी गुट की स्थापना की थी।



आप क़बीली सिस्टम के सख्त विरोधी थे और आप ही ने इसके विरोध की शुरूआत की।



हज़रत इमाम खुमैनी के पेरिस हिजरत करने के बाद, इमाम मूसा सद्र का एक आर्टिकल (मज़मून) लोमंड नामी एक न्यूज़ पेपर में छपा जिसमें उन्होनें ईरान के



इंक़िलाब को खुदा के नबियों के इंक़िलाब का एक सिलसिला बताया और हज़रत इमाम खुमैनी को ईरान के बड़े इंक़िलाब का अकेला और बेहतरीन लीडर बताकर दुनिया के सामने पेश किया।



आपने कट्टरपंथी यहूदियों के खिलाफ बहुत बड़े बड़े क़दम उठाए। सन 1357 (शम्सी हिजरी) शहरीवर के महीने में आप अल्जज़ीरा गए और वहाँ के



मज़हबी और सियासी लीडर्स से मिलने के बाद लीबिया पहुंचे। अचानक पाँच दिन के बाद उनके अपहरण होने की खबर आई।



इसके बावजूद लीबिया की गवर्मेन्ट उनके अपहरण से खुद को हमेशा बचाती है और उनके अपहरण में अपना हाथ होने से इंकार करती है।



इमाम मूसा सद्र लेबनान के शियों के लिए एक बेहतरीन मार्ग दर्शक और लीडर की हैसियत रखते थे। वहाँ के उलमाँ (विध्दवान) और बड़ी बड़ी शख्सियतें चाहे सुन्नी हों या



शिया सभी आपको अपना मददगार समझते थे।